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यूपी भूलेख खसरा खतौनी: गाटा, नाम और खाता संख्या से रिकॉर्ड कैसे देखें?

Akanksha 8 min October 24, 2026
खेत में मोबाइल से यूपी भूलेख खसरा खतौनी जानकारी देखती किसान महिला की सांकेतिक तस्वीर

यूपी भूलेख खसरा खतौनी ऑनलाइन कैसे देखें? पहले तय करें कि आपको खातेदार के नाम और गाटा का अधिकार अभिलेख चाहिए या खेत की खसरा/फसल रिपोर्ट। खतौनी के लिए यूपी भूलेख पर “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें” खोलें। खसरे की रिपोर्ट के लिए ई-खसरा पर “खसरा देखें” चुनें। दोनों में जनपद, तहसील और राजस्व ग्राम सही चुनना जरूरी है। इस गाइड में गाटा नंबर, खाता संख्या और खातेदार के नाम से खोज का रास्ता भी अलग-अलग समझाया गया है।

समीक्षा: 24 अक्टूबर 2026। सरकारी पोर्टलों के विकल्प बदल सकते हैं। यह SarkariAsk की स्वतंत्र जानकारी है; वेबसाइट उत्तर प्रदेश सरकार का पोर्टल नहीं है।

सीधे सरकारी पोर्टल खोलें
ई-खसरा: खसरा रिपोर्ट देखें ↗
यूपी भूलेख: खतौनी/अधिकार अभिलेख देखें ↗
यूपी भू-नक्शा: गाटा का नक्शा देखें ↗

खसरा, खतौनी और गाटा क्या हैं—किस काम आते हैं?

खसरा राजस्व ग्राम के खेतों से जुड़ा सर्वे अभिलेख है। इसमें भूखंड और खेती से संबंधित प्रविष्टियाँ दर्ज होती हैं। फसल और खेत की वर्तमान स्थिति जैसी जानकारी मौसम तथा रिकॉर्ड के अद्यतन पर निर्भर करती है। गाजियाबाद जिला प्रशासन खसरे को सर्वे पुस्तक, खतौनी को खाता पुस्तक और शजरे को ग्राम मानचित्र के रूप में समझाता है।

किसान खसरा इसलिए देखते हैं कि वे अपने खेत की पहचान और दर्ज फसल से जुड़ी जानकारी का मिलान कर सकें। कृषि संबंधी आवेदन, अभिलेख मिलान या किसी प्रविष्टि पर सवाल उठने पर यह उपयोगी संदर्भ हो सकता है। किसी बैंक, योजना, न्यायालय या कार्यालय में कौन-सा दस्तावेज स्वीकार होगा, यह उसी संस्था की वर्तमान शर्तों से तय होता है; स्क्रीन पर दिख रही अप्रमाणित नकल को हर जगह प्रमाणित प्रति न मानें।

पहले कौन-सी जानकारी तैयार रखें?

  • जनपद और तहसील: वही चुनें जहाँ संबंधित राजस्व ग्राम दर्ज है।
  • राजस्व ग्राम का सही नाम या ग्राम कोड: एक जैसे नाम वाले गाँव हो सकते हैं; कोड मिलने पर उससे पुष्टि करें।
  • गाटा/खसरा संख्या: अपने पुराने अभिलेख या उपलब्ध खतौनी से नंबर मिलाएँ।
  • संबंधित फसली वर्ष: फसल की जानकारी समय के साथ बदल सकती है; यदि पोर्टल वर्ष चुनने का विकल्प दे, तो सही अवधि देखें।

ई-खसरा पोर्टल पर खसरा रिपोर्ट कैसे देखें? चरण-दर-चरण

  1. आधिकारिक वेबसाइट खोलें: मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में ekhasra.up.gov.in खोलें। URL में up.gov.in की वर्तनी जाँचें।
  2. “खसरा देखें” चुनें: यह नागरिकों के लिए दिखने वाला विकल्प है। विभागीय कर्मचारी का “खसरा लॉगिन” आम पाठक के लिए आवश्यक नहीं है।
  3. जनपद चुनें: सूची में अपने खेत वाला जिला चुनें।
  4. तहसील और ग्राम चुनें: दिखाई देने वाली तहसील चुनें, फिर ग्राम का नाम/कोड या पहले अक्षर की सहायता से सही राजस्व ग्राम तक पहुँचें।
  5. आगे का खोज विकल्प देखें: पोर्टल जो गाटा, खसरा या रिपोर्ट संबंधी विकल्प दिखाए, उसमें अपने अभिलेख के अनुसार विवरण भरें। इंटरफ़ेस बदल सकता है; स्क्रीन पर उपलब्ध निर्देश ही मानें।
  6. रिपोर्ट मिलाएँ: गाँव, गाटा/खसरा संख्या और उपलब्ध फसल/खेत विवरण पुराने कागज़ तथा जमीन की वास्तविक स्थिति से मिलाएँ। पुराने फसली वर्ष की फसल को वर्तमान फसल न समझें।
  7. नकल सुरक्षित रखें: डाउनलोड या प्रिंट का विकल्प उपलब्ध हो तो प्रति रखें। राजस्व परिषद के सेवा विवरण में खसरे की नकल को अप्रमाणित प्रति बताया गया है; प्रमाणित प्रति चाहिए तो संबंधित कार्यालय से वर्तमान प्रक्रिया पूछें।
ध्यान दें: अगर आप “खसरा नंबर से जमीन किसके नाम है?” खोज रहे हैं, तो प्रायः आपको खतौनी/अधिकार अभिलेख देखना है। इसके लिए नीचे दिया यूपी भूलेख वाला तरीका अपनाएँ। खसरा की फसल रिपोर्ट और खातेदार की खतौनी एक ही दस्तावेज नहीं हैं।

यूपी भूलेख पर खसरा/गाटा संख्या से खतौनी कैसे देखें?

  1. यूपी भूलेख की आधिकारिक साइट खोलें।
  2. “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें” विकल्प चुनें।
  3. जनपद, तहसील और राजस्व ग्राम चुनें।
  4. स्क्रीन पर दिए खोज विकल्पों में खसरा/गाटा संख्या चुनकर संख्या भरें। जहाँ उपलब्ध हो, खाता संख्या या खातेदार के नाम से भी खोज सकते हैं।
  5. परिणाम में सही नंबर और खाता चुनकर उद्धरण खोलें। खातेदार, गाटा और रकबा ध्यान से मिलाएँ।

यहाँ मिलने वाला अधिकार अभिलेख खसरे की फसल रिपोर्ट से अलग है। विस्तृत खतौनी प्रक्रिया के लिए हमारी यूपी भूलेख खतौनी गाइड पढ़ें। खसरा और खतौनी का अर्थ समझना हो तो दोनों अभिलेखों के अंतर वाली गाइड देखें।

खाता संख्या या खातेदार के नाम से खतौनी कैसे खोजें?

गाटा संख्या याद न हो तो यूपी भूलेख पर अधिकार अभिलेख वाला विकल्प खोलें और जनपद, तहसील, ग्राम चुनें। खोज के उपलब्ध विकल्पों में खाता संख्या या खातेदार का नाम चुनें। नाम से कई परिणाम आ सकते हैं, इसलिए केवल मिलते-जुलते नाम पर भरोसा न करें; संबंधित गाटा, गाँव और रकबा भी जाँचें। सरकारी पोर्टल की स्क्रीन पर जो खोज विकल्प उपलब्ध हों, वही इस्तेमाल करें।

वर्तमान और पुरानी खतौनी तथा प्रमाणित प्रति में अंतर

  • वर्तमान खतौनी: अभी प्रदर्शित अधिकार अभिलेख। रिकॉर्ड खुलने पर फसली वर्ष और अद्यतन विवरण देखें।
  • पुरानी खतौनी: यदि पोर्टल पर पुराने फसली वर्ष का विकल्प मिले, तो संबंधित वर्ष चुनकर ऐतिहासिक प्रविष्टि देखें। इसे वर्तमान स्थिति का प्रमाण न समझें।
  • अप्रमाणित नकल: ऑनलाइन अवलोकन के लिए दिखाई जाने वाली प्रति। इसमें दर्ज जानकारी उपयोगी है, पर औपचारिक प्रयोजन में प्रमाणित प्रति की शर्त अलग हो सकती है।
  • प्रमाणित प्रति: यूपी भूलेख के मुखपृष्ठ पर ऑनलाइन भुगतान से खतौनी की प्रमाणित प्रति लेने की अलग सेवा सूचीबद्ध है। आवश्यक शुल्क, उपलब्धता और स्वीकृति की वर्तमान जानकारी सरकारी सेवा पर जाँचें। खसरे की प्रमाणित प्रति का तरीका संबंधित तहसील से पूछें।

खसरा, खतौनी और भू-नक्शा में अंतर

किसी जमीन की जाँच में केवल एक स्क्रीन पर्याप्त नहीं होती। नंबर, गाँव, रकबा और आवश्यक पुराने दस्तावेज़ अलग-अलग मिलाएँ। नक्शे के चित्र और अधिकार अभिलेख में अंतर हो तो तहसील से पुष्टि करें।

खसरा रिपोर्ट नहीं मिल रही या विवरण गलत है तो क्या करें?

  1. पहले स्थान जाँचें: जनपद, तहसील और समान नाम वाले गाँव में सही ग्राम कोड चुना है या नहीं।
  2. नंबर तथा अवधि मिलाएँ: गाटा/खसरा संख्या और फसली वर्ष पुराने दस्तावेज़ से जाँचें।
  3. तकनीकी परेशानी अलग पहचानें: पेज लोड न हो तो कुछ समय बाद पुनः खोलें; रिकॉर्ड की गलती और वेबसाइट की अस्थायी त्रुटि अलग बातें हैं।
  4. सुधार के लिए स्थानीय कार्यालय से प्रक्रिया पूछें: गलत प्रविष्टि का स्क्रीनशॉट, उपलब्ध खतौनी और संबंधित दस्तावेज लेकर लेखपाल/तहसील में पूछें कि इस प्रविष्टि का सुधार कौन करता है। आवेदन दें तो उसकी प्राप्ति या संदर्भ संख्या रखें।

खातेदार के नाम या अंश में गलती का उपाय फसल संबंधी खसरा प्रविष्टि से अलग हो सकता है। गलत प्रक्रिया अपनाने से बचने के लिए पहले त्रुटि का प्रकार स्पष्ट करें।

मोबाइल पर दो उपयोगी ऐप: भूलेख साथी और UP Land Info Pro

सरकारी रिकॉर्ड की अंतिम पुष्टि ऊपर दिए आधिकारिक पोर्टल पर ही करें। नीचे के ऐप स्वतंत्र उपयोगिता ऐप हैं, सरकारी राजस्व विभाग के आधिकारिक ऐप होने का दावा नहीं करते। ऐप खोलने से पहले स्टोर पर नाम और डेवलपर की पहचान जाँचें।

📱 भूलेख साथी

भूमि रिकॉर्ड के संबंधित पोर्टल तक पहुँच, दस्तावेज़ खोलने और साझा करने जैसी सुविधाओं के लिए इसका ऐप पेज देखें। किसी भी सरकारी अभिलेख का डेटा मूल पोर्टल से फिर मिलाएँ।

फीचर और ऐप की पहचान देखें ↗
Android पर डाउनलोड ↗
iPhone पर डाउनलोड ↗

📱 UP Land Info Pro

भूमि रिकॉर्ड संबंधी शॉर्टकट और दस्तावेज़ उपयोगिताओं की जानकारी ऐप पेज पर देखें। प्रमाणित प्रति या सरकारी निर्णय के लिए संबंधित सरकारी सेवा ही उपयोग करें।

ऐप का परिचय और पहचान देखें ↗
Android पर डाउनलोड ↗

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या खसरा और खतौनी एक ही दस्तावेज हैं?

नहीं। खसरा खेत/सर्वे की प्रविष्टियों से और खतौनी खातेदार के अधिकार अभिलेख से संबंधित है। गाटा संख्या दोनों को मिलाने में मदद करती है, लेकिन दोनों का उपयोग अलग है।

क्या खसरा नंबर से जमीन का नाम देख सकते हैं?

खातेदार का नाम देखने के लिए यूपी भूलेख पर “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें” चुनकर खसरा/गाटा संख्या से खोजें। परिणाम में गाँव और नंबर अवश्य मिलाएँ।

क्या केवल नाम से जमीन का रिकॉर्ड निश्चित रूप से मिल जाएगा?

खातेदार के नाम से खोज उपलब्ध हो सकती है, लेकिन एक जैसे नाम आम हैं। सही जनपद, तहसील, ग्राम, गाटा और रकबा मिलाए बिना व्यक्ति या भूखंड की पहचान निश्चित न मानें।

मोबाइल से ई-खसरा कैसे देखें?

मोबाइल ब्राउज़र में आधिकारिक ई-खसरा पोर्टल खोलें, “खसरा देखें” चुनें, फिर जनपद, तहसील और ग्राम का चयन करें। यदि पेज छोटा दिखे तो फोन को क्षैतिज घुमाएँ या ब्राउज़र में ज़ूम करें।

क्या ऑनलाइन दिखाई गई खसरा नकल प्रमाणित होती है?

राजस्व परिषद की सेवा सूची में खसरे की डाउनलोड नकल को अप्रमाणित प्रति बताया गया है। आधिकारिक काम के लिए प्रमाणित प्रति की जरूरत है या नहीं, संबंधित कार्यालय से पूछें।

आधिकारिक स्रोत और जाँच: उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद, ई-खसरा, यूपी भूलेख, यूपी भू-नक्शा और गाजियाबाद जिला प्रशासन का भूमि अभिलेख विवरण। पोर्टल के विकल्प और प्रक्रियाएँ बदल सकती हैं; अंतिम निर्णय के लिए वर्तमान सरकारी स्क्रीन देखें।

इमेज क्रेडिट: फीचर्ड इमेज OpenAI से इस लेख के लिए बनाई गई मूल सांकेतिक तस्वीर है। इसमें कोई वास्तविक सरकारी पोर्टल स्क्रीन या सरकारी मुहर नहीं दिखाई गई है।

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