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Dakhil Kharij Kya Hota Hai? UP नामांतरण की सही प्रक्रिया

Akanksha 4 min October 23, 2026
उत्तर प्रदेश में दाखिल-खारिज और भूमि रिकॉर्ड जाँच का प्रतीकात्मक चित्र: खेत, भू-नक्शा, दस्तावेज़ और मोबाइल
चित्र: OpenAI से निर्मित मूल प्रतीकात्मक चित्र; यह सरकारी पोर्टल का स्क्रीनशॉट नहीं है।

Dakhil Kharij kya hota hai? उत्तर प्रदेश में दाखिल-खारिज या नामांतरण, भूमि के उत्तराधिकार या हस्तांतरण के बाद राजस्व अभिलेख (खतौनी) में संबंधित नाम दर्ज करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है। रजिस्ट्री और नामांतरण अलग प्रक्रियाएँ हैं। नामांतरण की प्रविष्टि अपने आप में मालिकाना हक का अंतिम फैसला नहीं है। स्वामित्व पर विवाद हो तो दस्तावेज़, लागू कानून और सक्षम न्यायालय/प्राधिकारी का आदेश महत्त्वपूर्ण होता है।

आधिकारिक स्रोत: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34–35 और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली देखें। यह स्वतंत्र जानकारीपरक लेख है, सरकारी सेवा या व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं।

रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में अंतर

  • रजिस्ट्री/बैनामा: संपत्ति के हस्तांतरण का पंजीकृत दस्तावेज़। उसका कानूनी प्रभाव दस्तावेज़, पक्षकारों के अधिकार और लागू कानून पर निर्भर करता है।
  • दाखिल-खारिज: हस्तांतरण/उत्तराधिकार के आधार पर राजस्व अभिलेख में नाम बदलने की कार्यवाही। तहसीलदार को रिपोर्ट/सूचना मिलने पर वह आवश्यक जाँच और उद्घोषणा के बाद आदेश देता है।
  • नतीजा: खतौनी में नाम दर्ज होना रिकॉर्ड अपडेट होने का प्रमाण है; इसे निर्विवाद टाइटल सर्टिफिकेट न समझें।

कब नामांतरण कराया जाता है?

  1. खरीद या अन्य हस्तांतरण: पंजीकृत दस्तावेज़ के बाद राजस्व रिकॉर्ड अपडेट कराने के लिए।
  2. उत्तराधिकार/वरासत: दर्ज खातेदार की मृत्यु के बाद पात्र उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज कराने के लिए।
  3. दानपत्र या वसीयत: संबंधित दस्तावेज़ और कानून के अनुसार; विवाद की स्थिति में अतिरिक्त जाँच/सुनवाई हो सकती है।

आवेदन से पहले क्या तैयार रखें?

  • सम्बंधित जमीन का जिला, तहसील, ग्राम, खाता और गाटा विवरण।
  • हस्तांतरण के मामले में पंजीकृत दस्तावेज़ और आवेदक की पहचान।
  • वरासत के मामले में मृत्यु और संबंध से जुड़े उपलब्ध प्रमाण।
  • वर्तमान खतौनी तथा केस/रजिस्ट्री संख्या, यदि उपलब्ध हो।

नियमावली के अनुसार हस्तांतरण की रिपोर्ट के लिए R.C. Form-11 और आवश्यक घोषणा/शुल्क का प्रावधान है। दस्तावेज़ और शुल्क परिस्थिति तथा वर्तमान सरकारी आदेश पर निर्भर करते हैं; भुगतान से पहले राजस्व परिषद या स्थानीय तहसील से पुष्टि करें।

नामांतरण की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण

  1. रिपोर्ट/आवेदन: संबंधित तहसील में हस्तांतरण या उत्तराधिकार की सूचना और जरूरी दस्तावेज़ दें। पंजीयन विभाग की सूचना भी तहसील को भेजी जा सकती है।
  2. उद्घोषणा और जाँच: धारा 35 के तहत तहसीलदार उद्घोषणा जारी कर आवश्यक जाँच करता है। किसी मामले में स्थानीय रिपोर्ट ली जा सकती है; इसे हर मामले का अनिवार्य एक-जैसा चरण न मानें।
  3. आपत्ति और सुनवाई: आपत्ति हो तो पक्षकारों को अपने प्रमाण रखने का अवसर मिलता है। निष्कर्ष दस्तावेज़ और आदेश पर निर्भर करेगा।
  4. आदेश और रिकॉर्ड: आदेश होने पर लागू प्रविष्टि खतौनी में दर्ज की जाती है। अपडेट देखने के लिए आधिकारिक UP Bhulekh खोलें।

केस संख्या हो तो आधिकारिक RCCMS/वाद पोर्टल पर उपलब्ध स्थिति देख सकते हैं। पोर्टल का पता बदलने या सेवा बाधित होने पर राजस्व परिषद की वेबसाइट से वर्तमान लिंक लें।

रिकॉर्ड अपडेट न दिखे या आपत्ति आए तो क्या करें?

  • पहले केस का आदेश और उसकी तारीख जाँचें; केवल आवेदन देना अंतिम नामांतरण नहीं है।
  • खतौनी में पुराना नाम हो तो आदेश की प्रति और वर्तमान रिकॉर्ड लेकर संबंधित तहसील में लिखित जानकारी दें।
  • आपत्ति/टाइटल विवाद में अपने दस्तावेज़ सहित योग्य वकील या संबंधित राजस्व अधिकारी से सलाह लें।
  • जमीन खरीदने से पहले केवल खतौनी नहीं, पंजीकृत दस्तावेज़, बंधक/वाद और स्थल की स्वतंत्र जाँच भी कराएँ।

मोबाइल से रिकॉर्ड देखने के लिए हमारी खतौनी खोलने की मार्गदर्शिका पढ़ें। निजी ऐप और सरकारी पोर्टल को अलग पहचानें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नामांतरण से मालिकाना हक तय हो जाता है?

नहीं। यह राजस्व अभिलेख की प्रविष्टि है। स्वामित्व का विवाद संबंधित दस्तावेज़ों और सक्षम प्राधिकारी/न्यायालय के निर्णय से तय होता है।

नामांतरण की स्थिति कैसे देखें?

केस संख्या से आधिकारिक राजस्व वाद पोर्टल में उपलब्ध स्थिति देखें और आदेश के बाद आधिकारिक UP Bhulekh पर खतौनी मिलाएँ।

आपत्ति हो तो क्या करें?

नोटिस/सुनवाई की तारीख देखें, अपने प्रमाण व्यवस्थित करें और ज़रूरत हो तो कानूनी सलाह लें। बिना आदेश के परिणाम का अनुमान न लगाएँ।

स्रोत-जाँच: 23 अक्टूबर 2026। राजस्व संहिता नियमावली · UP Bhulekh · राजस्व परिषद।

One response to “Dakhil Kharij Kya Hota Hai? UP नामांतरण की सही प्रक्रिया”

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