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UP RC Status Check: Official Recovery Certificate Guide

Akanksha 5 min October 21, 2026
नागरिक लैपटॉप पर उत्तर प्रदेश के राजस्व वसूली प्रमाणपत्र की स्थिति जाँचते हुए

उत्तर प्रदेश में वसूली प्रमाणपत्र (Recovery Certificate/RC) की स्थिति देखने के लिए सही आधिकारिक सेवा चुनें। राजस्व परिषद का वसूली प्रमाणपत्र पोर्टल कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या से स्थिति खोजने का विकल्प देता है। यदि आपका संदर्भ राजस्व न्यायालय का मुकदमा है, तो उसके लिए अलग RCCMS केस पोर्टल देखें। ये दोनों रिकॉर्ड एक-दूसरे के स्थानापन्न नहीं हैं।

पहले यह पहचानें: आपके पास कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या वाला RC/डिमांड नोटिस है, या राजस्व न्यायालय का वाद नंबर? नोटिस पर लिखे विभाग, संख्या और निर्देश से तय करें।

उत्तर प्रदेश में RC और RCCMS में क्या अंतर है?

  • वसूली प्रमाणपत्र पोर्टल: राजस्व परिषद की RC प्रणाली में कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या से मांग पत्र की स्थिति खोजने की सुविधा है। पोर्टल पर दिखाई गई जानकारी को उसी प्रविष्टि के संदर्भ में पढ़ें।
  • RCCMS: राजस्व न्यायालयों के वाद, सुनवाई और उपलब्ध आदेश से जुड़ी जानकारी देता है। इसे हर विभागीय बकाया, भुगतान खाते या सभी RC का सार्वभौमिक रिकॉर्ड न मानें।
  • विभाग/ऋणदाता का खाता: बकाया की मूल गणना, भुगतान और समायोजन की पुष्टि संबंधित विभाग या ऋणदाता से भी लें। अलग-अलग कानून और मांगों की प्रक्रिया अलग हो सकती है।

ऑनलाइन RC status कैसे जाँचें?

  1. राजस्व परिषद के आधिकारिक “मांग पत्र की स्थिति” पेज को खोलें। ब्राउज़र के पता-पट्टी में bor.up.nic.in डोमेन जाँचें।
  2. अपने नोटिस/आधिकारिक पत्र पर दी गई कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या पहचानें। अंक और वर्ष उसी तरह रखें जैसे दस्तावेज़ में छपे हैं। केवल अनुमान से कोई संख्या न भरें।
  3. पोर्टल पर मांगी गई जानकारी भरें और उपलब्ध परिणाम खोलें। पेज के मौजूदा निर्देश और सुरक्षा जाँच का पालन खुद करें।
  4. परिणाम में उपलब्ध मांग पत्र संख्या, संबंधित नाम/विभाग और स्थिति का अपने नोटिस से मिलान करें। यदि राशि, जमा/वसूली, स्थगन या अन्य विवरण दिखें, तो उन्हें उसी समय उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के रूप में पढ़ें और विभाग से पुष्टि करें।
  5. यदि मामला अदालत/राजस्व न्यायालय में दर्ज है, तो नोटिस पर दिए वाद संदर्भ से RCCMS में अलग से खोजें। सही केस नंबर, वर्ष और पक्षकार मिलाए बिना किसी समान नाम वाले परिणाम को अपना न मानें।
  6. परिणाम न मिले, संख्या अलग हो या पेज उपलब्ध न हो, तो नोटिस पर दिए जारीकर्ता विभाग/कार्यालय से लिखित रूप में अगला तरीका पूछें। ऑनलाइन परिणाम न मिलना अपने-आप नोटिस रद्द, भुगतान पूरा या वाद समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।

नोटिस और ऑनलाइन परिणाम मिलाते समय चेकलिस्ट

  • नोटिस पर दर्ज व्यक्ति/संस्था और संबंधित पता।
  • जारी करने वाला विभाग, कार्यालय और पत्र की तारीख।
  • कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या या अदालत का वाद नंबर—दोनों को आपस में न मिलाएँ।
  • मांग की रकम, बकाया अवधि और नोटिस में उद्धृत कानून/आदेश।
  • पहले किए गए भुगतान की रसीद और विभाग/ऋणदाता के खाते में उसका समायोजन।
  • पोर्टल पर उपलब्ध परिणाम की तारीख/स्थिति और नोटिस से कोई अंतर।

यदि नाम, मांग या भुगतान में अंतर हो, तो जारीकर्ता कार्यालय से संपर्क कर लिखित स्पष्टीकरण और स्वीकार्य दस्तावेज़ों की सूची लें। आवेदन या आपत्ति जमा करें तो उसकी दिनांकित प्राप्ति रखें। समय-सीमा या कानूनी उपाय नोटिस और लागू कानून पर निर्भर करते हैं; ऐसे मामले में योग्य वकील से सलाह लें।

गोपनीयता और भुगतान सुरक्षा

  • किसी सार्वजनिक टिप्पणी, संदेश या अनौपचारिक साइट पर पूरा नोटिस, आधार/पैन, बैंक विवरण, OTP या पासवर्ड साझा न करें।
  • किसी निजी UPI ID या कॉलर के कहने पर भुगतान न करें। भुगतान का तरीका नोटिस और संबंधित विभाग/ऋणदाता से स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें।
  • सरकारी पोर्टल पर भी केवल उतनी जानकारी दें जितनी आधिकारिक फॉर्म मांगता है; संदिग्ध लिंक पर दस्तावेज़ अपलोड न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या RC status और RCCMS case status एक ही हैं?

नहीं। RC पोर्टल कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या वाली वसूली प्रविष्टि के लिए है; RCCMS राजस्व न्यायालय के वाद-संबंधी रिकॉर्ड के लिए है। अपने कागज़ पर दिए संदर्भ के अनुसार सेवा चुनें।

कंप्यूटरीकृत मांग पत्र संख्या नहीं है तो क्या करें?

नोटिस पर दिया मूल संदर्भ लेकर उसे जारी करने वाले विभाग/कार्यालय से पूछें कि कंप्यूटरीकृत संख्या कहाँ मिलेगी या कौन-सी सेवा इस्तेमाल करनी है। अनुमान से संख्या न बनाएँ।

ऑनलाइन परिणाम न मिलने का क्या अर्थ है?

सिर्फ़ परिणाम न मिलने से मांग रद्द, भुगतान दर्ज या मामला बंद सिद्ध नहीं होता। मूल नोटिस और संबंधित कार्यालय से स्थिति की पुष्टि करें।

क्या SarkariAsk बकाया की वैधता तय करता है?

नहीं। SarkariAsk एक स्वतंत्र सूचना-साइट है, सरकारी विभाग या कानूनी सलाहकार नहीं। आपके मामले में संबंधित नोटिस, लागू कानून और सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि निर्णायक है।

आधिकारिक लिंक

अंतिम जाँच: 23 अक्टूबर 2026। पोर्टल के मेनू, उपलब्ध रिकॉर्ड और दिखाए जाने वाले विवरण बदल सकते हैं; अंतिम पुष्टि संबंधित आधिकारिक पेज और जारीकर्ता कार्यालय से करें। यह सामान्य सूचना है, किसी व्यक्ति के बकाया या कानूनी अधिकार पर निर्णय नहीं। SarkariAsk उत्तर प्रदेश सरकार से संबद्ध नहीं है।

चित्र श्रेय: SarkariAsk के लिए बनाया गया मूल AI संपादकीय चित्र; यह सरकारी पोर्टल का स्क्रीनशॉट नहीं है।

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